1.)
कर दे तू अपनी हस्ती को फ़ना
ए इंसान तू है इसीलिए बना |
2.)
गुज़रे ज़माने की तस्वीर धुंधली
नहीं होने देता
जब भी वक़्त मिला सफ़र ज़रूर करता
हूँ |
हर ज़र्रे पे अपनी बसरत पेश करता
हूँ
जो मिल जाए उसे सलाम ज़रूर करता
हूँ |
सफ़र के इस बसर में बंदोबस्त क्या
करना
जो मिल जाए वही शुक्र-ए-खुदा ज़रूर
करता हूँ |
आईना सॉफ करते करते जब कभी तक गया
एक बार अपने अक्स को सॉफ ज़रूर
करता हूँ |
3.)
इक अड़ना सा आईना हमें खुद से रूबरू
करता है
और गुमान में चूर लोग कहते हैं
मैने दुनिया देखी है |
4.)
तौबा कर
कर के
गलती हर
बार करते
हैं ।
इंसानी फितरत है
ये कि
कारनामा हर
बार करते
है ।
5.)
बड़ी
दूर से चल कर आया हूँ
कुछ खुशियों के पल अपने साथ लाया
हूँ |
6.)
कुछ काग़ज़ मेरी कमीज़ मे पसीज़ रहे हैं
आप मेरे अज़ीज़ों में अज़ीज़ रहे हैं
यारों ये सियासत है
ना जाने कितने इसके मरीज़ रहे हैं |
7.)
अभी ना जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं
अब किसे कहें अपना के कोई यहाँ खरा नहीं |
8.)
उनकी नज़ाकत है एक उल्फत जिसकी खरीद फरोख्त तो खूब हुई,
ग़र हुस्न के किसी खरीदारों से ग़म-ए-दिल ख़रीदा न गया ।