रविवार, 6 अगस्त 2017

वाह रे सिविल कोड की दलील पेश करने वालों

"नेताओं का DNA ऐसा ही है बस यह सत्ता की लालच है, जो इन्हें थोड़ा संकोची बनाए हुए है"
 
हरियाणा बीजेपी के अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे पर एक आईएएस की बेटी का पीछा करने के मामले में सीएम मनोहर लाल ने कहा है कि इस घटना के लिए सुभाष बराला के बेटे को दंडित नहीं किया जा सकता है.

"पीड़ित महिला का कहना है कि उस रात वे उसकी कार के इतना करीब अपनी कार चला रहे कि वह बुरी तरह डर गई थीं कि उनकी कार को टक्कर तक लग सकती है. पीड़ित ने कहा- मेरे हाथ कांप रहे थे... मेरी  पीठ पूरी तरह ऐंठ चुकी थी. मैं कुछ बेसुध थी.. और मेरे आंसू लगातार बह रहे थे... मैं नहीं जानती थी कि मेरे साथ आज की रात क्या होने वाला है. कौन जानता था कि पुलिसवाले आएंगे भी या नहीं... पीड़ित महिला ने अपनी फेसबुक पोस्ट में यह बात कही थी"
 
"जनता देख ले यह भी सुशासन"


शनिवार, 5 अगस्त 2017

कुछ कहना है |

जावड़ेकर साहब थोड़ा होम वर्क करने के बाद किसी निर्णय पर पहुँचा कीजिए |
बात झूठ निकल जाए तो आपकी पार्टी और धर्म दोनों के मूलभूत स्तंभों को ध्वस्त कर देती है |


बुधवार, 2 अगस्त 2017

नीतीश बाबू आप के शागिर्द जवाब चाहते हैं |

नीतीश बाबू किस कोने दुबक गयी आपकी नैतिकता ?

एक आम आदमी है जो डर जाता है पोलीस के नाम से |
सियासत भी क्या चीज़ है, मुजरिम भी मंत्री बने बैठे हैं | |

बिन कीचड़ कमल कैसा

आज हम एक ऐसे दौर से गुज़र रहे हैं जहाँ एक सत्ताधारी दल हर कहीं जीत का स्वाद चखना चाहती है |
हार उसे स्वीकार ही नहीं है |

यही कारण है कि किसी भी प्रकार से वह देश के हर राज्य के साथ साथ संसद के दोनों सदनों में अपने या उनके जैसी विचारधारा वालों को देखना चाहती है जो किसी भी देश के लोकतंत्र के लिए एक ख़तरे की घंटी है |

ऐसा इसलिए भी है कि जो राजनीतिक दल की सोच में ही लोगों के बीच में द्वेष की भावना को बढ़ावा देना और किसी विशेष बहुसंख्यक संप्रदाय को अल्पसंख्यकों के नाम पर डर को संजोने का काम करना हो |

ऐसे में एक ज़िम्मेदार नागरिक के तौर पर हमारी ज़िम्मेदारी अत्यधिक बढ़ जाती है और ऐसी ताकतों को पनपने से रोकने की ज़रूरत स्वत ही बन जाती है यदि हम सचमुच लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं |


मंगलवार, 1 अगस्त 2017

सोशल मीडीया


सच्चाई, अब तुम पिछड़ रही हो |
अब तो इनके भी करोड़ों में चाहने वाले हैं |


शुक्रवार, 28 जुलाई 2017

थूक कर चाटना किसे कहते हैं यह vedio देखिए |

https://khabar.ndtv.com/video/show/news/dont-you-remember-that-what-happend-in-2015-bihar-assembly-elections-463940?pfrom=home-khabar_mcd_main_headline

थूक कर चाटना किसे कहते हैं यह vedio देखिए |

राजनीति एक अवसरवादिता है | वैचारिक मूल्यों को दरकिनार करती देश की राजनीति |

अब तो यही लगता है -

क्या वह देश की भुखमरी दूर करेंगे ?
जिन्हे खुद सत्ता की भूख लगी हो | |



गुरुवार, 20 जुलाई 2017

ज़िम्मेदार नागरिक बनें

"वोट" दिया बहुत बढ़िया ।
 
किंतु उसके बाद एक और चीज़ होती है, वो है "चोट" ।

यदि सत्ताधरियों को यह ना मिले तो उनमें एक अलग तरह की "खोट " व्याप्त हो जाती है ।
 
यह काम केवल किन्ही चन्द civil society मात्र का काम नहीं बल्कि हर ज़िम्मेदार नागरिक का है ।
 
अतः अपनी ज़िम्मेदारी समझें वोट देकर सत्ताधरियों को अखरोट ना खाने दें ।
 
अपनी पढ़ाई, कमाई और दवाई के लिए अपने सामर्थ्य के साथ साथ सरकारों के सामर्थ्य की भी ख़ून जाँच करवाते रहें ।
हसनैन ।