मंगलवार, 24 फ़रवरी 2015

Various.....


1.) 
   कर दे तू अपनी हस्ती को फ़ना
    ए इंसान तू है इसीलिए बना |

2.) 
गुज़रे ज़माने की तस्वीर धुंधली नहीं होने देता
जब भी वक़्त मिला सफ़र ज़रूर करता हूँ |
हर ज़र्रे पे अपनी बसरत पेश करता हूँ
जो मिल जाए उसे सलाम ज़रूर करता हूँ |
सफ़र के इस बसर में बंदोबस्त क्या करना
जो मिल जाए वही शुक्र-ए-खुदा ज़रूर करता हूँ |
आईना सॉफ करते करते जब कभी तक गया
एक बार अपने अक्स को सॉफ ज़रूर करता हूँ |

3.)
इक अड़ना सा आईना हमें खुद से रूबरू करता है
और गुमान में चूर लोग कहते हैं मैने दुनिया देखी है |

4.)
तौबा कर कर के गलती हर बार करते हैं
    इंसानी फितरत है ये कि कारनामा हर बार करते है  

5.)
 बड़ी दूर से चल कर आया हूँ
कुछ खुशियों के पल अपने साथ लाया हूँ | 

6.)
कुछ काग़ज़ मेरी कमीज़ मे पसीज़ रहे हैं
आप मेरे अज़ीज़ों में अज़ीज़ रहे हैं
यारों ये सियासत है
ना जाने कितने इसके मरीज़ रहे हैं 


7.)
अभी ना जाओ छोड़कर के दिल अभी भरा नहीं
अब किसे कहें अपना के कोई यहाँ खरा नहीं | 


8.) 
उनकी नज़ाकत है एक उल्फत जिसकी खरीद फरोख्त तो खूब हुई,
ग़र हुस्न के किसी खरीदारों से ग़म-ए-दिल ख़रीदा न गया ।