इबादत
गुरुवार, 4 मई 2017
विश्वास पर विश्वास |
सियासत में किसी का नाम विश्वास होने पर भी
उस पर विश्वास ना कीजिएगा साहब |
हमने खून के रिश्तों को नाख़ून के
जैसे कटकर गिरते देखा है साहब |
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