सोमवार, 24 फ़रवरी 2014
रविवार, 23 फ़रवरी 2014
जातिगत सियासी घमासान
एक कहावत हमारे समाज में बहोत ही मशहूर है कि
"जाति जो कभी नहीं जाती।
यद्यपि वो तो मौत के बाद भी नहीं जाती "
इस सियासी घमासान में कोई पीछे हटता प्रतीत नहीं हो रहा तो आखिर सबसे प्रबल प्रत्याशी इस मौके को क्यूँ न भुनाए, मै बात कर रहा हूँ मोदी जी की , वो भी इसमें पीछे नहीं हट रहे क्यूंकि सियासी राजनीती में तो उनकी भी अच्छी पकड़ रही है, हर क्षेत्र को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता है उन्हें इस बात कि भी अनुमान है, अतः उत्तरी भारत कि राजनीती में इन्होने अल्पसंख्यकों पे सियासी वर्जिस कि ही है तो क्या बुरा है क्यूंकि उत्तर भारत में आज भी काफी हद तक जाति की संख्या के आधार पर ही टिकट का बंटवारा होता है, उदाहरणतयः यदि कोई क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य है तो उस क्षेत्र में ब्राह्मण प्रत्याशी ही होगा चाहे वो सपा,बसपा,कांग्रेस या भाजपा से हो। मैं दिल्ली की नहीं अन्य उत्तर भारत कि बात कर रहा हूँ।
यूँ, रही बात मोदी जी कि तो ये चुनौती बड़े ही शिद्दत और कश्मकश से मोदी जी को मिली है जिसे वो गँवाना नहीं चाह्ते हैं। किसी तरह का भी तंत्र जो उनके काम आजाये वो छोड़ने वाले नहीं है क्यूंकि उन्हें पता है कि इससे अच्छा मौका फिर दोबारा मिलने वाला नहीं है इसलिए कोई कसर न रहे उसका पूरा इंतेज़ाम करने में जुटे हुए हैं क्यूंकि ये मौका गया तो मोदी जी के भी अरमान अडवाणी जी कि तरह ही बन कर रह जायेंगे। उन्हें इस बात का भी आभास है कि सारी परिस्थितियां मेरे लिए ही अनुकूल बनी हुयी है कहीं ये मौका यदि अगले पाँच वर्ष के लिए टला तो समझ लीजिये सपना, सपना ही बन कर रह जायेगा, कारण सिर्फ और सिर्फ दो ही है जो मोदी जी को इस बार थोडा साँस लेने पे मज़बूर कर रहा है, पहला तो ये कि कोंग्रेस का उनके सम्मुख छोटा हुवा कद और आम आदमी पार्टी का अन्य राज्यों कि सीमाओ तक न फैलना, किन्तु आने वाले पाँच वर्षो में तस्वीर बहोत हद तक बदलने वाली है।
"जाति जो कभी नहीं जाती।
यद्यपि वो तो मौत के बाद भी नहीं जाती "
इस सियासी घमासान में कोई पीछे हटता प्रतीत नहीं हो रहा तो आखिर सबसे प्रबल प्रत्याशी इस मौके को क्यूँ न भुनाए, मै बात कर रहा हूँ मोदी जी की , वो भी इसमें पीछे नहीं हट रहे क्यूंकि सियासी राजनीती में तो उनकी भी अच्छी पकड़ रही है, हर क्षेत्र को एक ही चश्मे से नहीं देखा जा सकता है उन्हें इस बात कि भी अनुमान है, अतः उत्तरी भारत कि राजनीती में इन्होने अल्पसंख्यकों पे सियासी वर्जिस कि ही है तो क्या बुरा है क्यूंकि उत्तर भारत में आज भी काफी हद तक जाति की संख्या के आधार पर ही टिकट का बंटवारा होता है, उदाहरणतयः यदि कोई क्षेत्र ब्राह्मण बाहुल्य है तो उस क्षेत्र में ब्राह्मण प्रत्याशी ही होगा चाहे वो सपा,बसपा,कांग्रेस या भाजपा से हो। मैं दिल्ली की नहीं अन्य उत्तर भारत कि बात कर रहा हूँ।
यूँ, रही बात मोदी जी कि तो ये चुनौती बड़े ही शिद्दत और कश्मकश से मोदी जी को मिली है जिसे वो गँवाना नहीं चाह्ते हैं। किसी तरह का भी तंत्र जो उनके काम आजाये वो छोड़ने वाले नहीं है क्यूंकि उन्हें पता है कि इससे अच्छा मौका फिर दोबारा मिलने वाला नहीं है इसलिए कोई कसर न रहे उसका पूरा इंतेज़ाम करने में जुटे हुए हैं क्यूंकि ये मौका गया तो मोदी जी के भी अरमान अडवाणी जी कि तरह ही बन कर रह जायेंगे। उन्हें इस बात का भी आभास है कि सारी परिस्थितियां मेरे लिए ही अनुकूल बनी हुयी है कहीं ये मौका यदि अगले पाँच वर्ष के लिए टला तो समझ लीजिये सपना, सपना ही बन कर रह जायेगा, कारण सिर्फ और सिर्फ दो ही है जो मोदी जी को इस बार थोडा साँस लेने पे मज़बूर कर रहा है, पहला तो ये कि कोंग्रेस का उनके सम्मुख छोटा हुवा कद और आम आदमी पार्टी का अन्य राज्यों कि सीमाओ तक न फैलना, किन्तु आने वाले पाँच वर्षो में तस्वीर बहोत हद तक बदलने वाली है।
अर्श से हो रही बरसात !!!
आसार तो बन रहे थे अर्श में कुछ यूँ ही
अहकाम तो खुदा ने भी भेज दिए कुछ यूँ ही
अर्श भी कुछ हो रहे थे अफ़रोज़ कुछ यूँ ही
पहलु में आरहे बादल भी कुछ यूँ ही
बादलों ने हवावों से गुफ्तगू कर कुछ ली यूँ ही
अक्स भी मुझको लग रहे सितारे कुछ यूँ ही
आलम कुछ खुशनुमा बन रहा इस ओर कुछ यूँ ही।
अहकाम तो खुदा ने भी भेज दिए कुछ यूँ ही
अर्श भी कुछ हो रहे थे अफ़रोज़ कुछ यूँ ही
पहलु में आरहे बादल भी कुछ यूँ ही
बादलों ने हवावों से गुफ्तगू कर कुछ ली यूँ ही
अक्स भी मुझको लग रहे सितारे कुछ यूँ ही
आलम कुछ खुशनुमा बन रहा इस ओर कुछ यूँ ही।
शनिवार, 22 फ़रवरी 2014
क्या जाने
"जिन्हे मेरी खबर न हो वो मेरे दिल का राज़ क्या जाने
जो रोशनी से हो महरूम वो आफ़ताब क्या जाने
जो हो मोहब्बत के नशे में चुर वो बेवफाई क्या जाने
ज़िन्दगी जीने वाले चैन और सुकून क्या जाने
जिनकी खुद खुदा से हो गुफ्तगू वो मेरी बात क्यूँ माने
जिनके दिल कि बात खुद खुदा जाने वो आरज़ू क्या जाने
जिन्हे मेरी खबर न हो वो मेरे दिल का राज़ क्या जाने "
जो रोशनी से हो महरूम वो आफ़ताब क्या जाने
जो हो मोहब्बत के नशे में चुर वो बेवफाई क्या जाने
ज़िन्दगी जीने वाले चैन और सुकून क्या जाने
जिनकी खुद खुदा से हो गुफ्तगू वो मेरी बात क्यूँ माने
जिनके दिल कि बात खुद खुदा जाने वो आरज़ू क्या जाने
जिन्हे मेरी खबर न हो वो मेरे दिल का राज़ क्या जाने "
नेता जी की जय हो!
आज एक नेता जी का इन्टरव्यू सुना जिन्होंने कल यु पी विधान सभा के अंदर अपना कुर्ता उतार दिया और एक महानुभाव ने तो कुर्ता सहित अपनी गंजी को भी नहीं छोड़ा खैर ये सब छोड़िये मुद्दे कि बात पर आते है, कल उनसे एक पत्रकार ने प्रश्न पूछा कि फिल्मों में ये काम तो सलमान खान भी खूब करते हैं, नेता ने पट से जवाब दिया अरे क्या वो नचनियों की बात करते हो, कहते ही आग बबूला हो गया और कहता है आप हमारी तुलना उस नचनिये से करते हो। मेरा मन तो कहता,
कि ये नेता जी वही होंगे जो अभी सैफई महोत्सव में आये हुए सलमान खान के साथ एक फोटू के लिए तरस रहे होंगे। और घर जाने पर इनकी बेगम और बच्चों ने भी खूब कोसा होगा कि, हटो तुम एक फोटू तो निकलवा नहीं पाये सलमान खान के साथ इतना बढियां मौका था और बनते हो अपने आप को बहोत बड़े नेता नपोरी। फिर यही नेता ने ये बात कहते हुए अपना पीछा छुड़ाया होगा कि अरे समझती नहीं हो वो अखिलेश और नेता जी(मुलायम सिंह) के साथ थे कहाँ हमारा नंबर आता और वैसे भी इन्टरनेसनल आदमी है सलमान खान।
और आज देखिये मौके कि नज़ाकत और अपने शर्मशार किये हुवे काम को किस अंदाज़ में अपनी हेकड़ी को दिखने कि कोशिश कर रहे हैं और अपना पाला बदल कर कहते हैं हमारी तुलना उससे मत करो सही बात है , तुलना कहाँ हो सकती है कहाँ एक खूबसूरत और हुनर से लबरेज़ इस देश का नायक और कहाँ तुम ठहरे देश के नालायक।
कि ये नेता जी वही होंगे जो अभी सैफई महोत्सव में आये हुए सलमान खान के साथ एक फोटू के लिए तरस रहे होंगे। और घर जाने पर इनकी बेगम और बच्चों ने भी खूब कोसा होगा कि, हटो तुम एक फोटू तो निकलवा नहीं पाये सलमान खान के साथ इतना बढियां मौका था और बनते हो अपने आप को बहोत बड़े नेता नपोरी। फिर यही नेता ने ये बात कहते हुए अपना पीछा छुड़ाया होगा कि अरे समझती नहीं हो वो अखिलेश और नेता जी(मुलायम सिंह) के साथ थे कहाँ हमारा नंबर आता और वैसे भी इन्टरनेसनल आदमी है सलमान खान।
और आज देखिये मौके कि नज़ाकत और अपने शर्मशार किये हुवे काम को किस अंदाज़ में अपनी हेकड़ी को दिखने कि कोशिश कर रहे हैं और अपना पाला बदल कर कहते हैं हमारी तुलना उससे मत करो सही बात है , तुलना कहाँ हो सकती है कहाँ एक खूबसूरत और हुनर से लबरेज़ इस देश का नायक और कहाँ तुम ठहरे देश के नालायक।
बुधवार, 12 फ़रवरी 2014
आग़ाज़ एक ऐसा भी !
अभी तक हमारे देश के चंद नुमाइंदों ने चुनिंदा लोगों (आईएएस और भी काबिल लोग) को सिर्फ और सिर्फ किसी लोभ अथवा ऐसे पद जिसमे किसी तरह कि निर्णयात्मक कार्य कि गुंजाईश ही न हो, ऐसे लोगों को चुना किन्तु अरविन्द केजरिवल ने ऐसे पदों को दरकिनार कर जो बीड़ा उठाया वो अपने स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि उस हर एक भारत वर्ष के नागरिक के लिए जिसने अपने हृदय में १ ज्योति जला रखी है कि कुछ तो बदलेगा इस देश में. निश्चितरूप से इससे बेहतर विकल्प और आदर्श आज तक देश को किसी ने नहीं दिया ।
मैं सभी भारत वर्ष के लोगों से आग्रह करता हूँ कृपया इस देश में बहती हुयी धनात्मक लहर को कम न होने दो, आज चाहे वो जिस किसी पार्टी से सम्बंधित हो उसे कम से कम आलोचना न करके इनके इस पहलकदमी का गर्मजोश से स्वागत करना चाहिए।
मैं सभी भारत वर्ष के लोगों से आग्रह करता हूँ कृपया इस देश में बहती हुयी धनात्मक लहर को कम न होने दो, आज चाहे वो जिस किसी पार्टी से सम्बंधित हो उसे कम से कम आलोचना न करके इनके इस पहलकदमी का गर्मजोश से स्वागत करना चाहिए।
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