"जिन्हे मेरी खबर न हो वो मेरे दिल का राज़ क्या जाने
जो रोशनी से हो महरूम वो आफ़ताब क्या जाने
जो हो मोहब्बत के नशे में चुर वो बेवफाई क्या जाने
ज़िन्दगी जीने वाले चैन और सुकून क्या जाने
जिनकी खुद खुदा से हो गुफ्तगू वो मेरी बात क्यूँ माने
जिनके दिल कि बात खुद खुदा जाने वो आरज़ू क्या जाने
जिन्हे मेरी खबर न हो वो मेरे दिल का राज़ क्या जाने "
जो रोशनी से हो महरूम वो आफ़ताब क्या जाने
जो हो मोहब्बत के नशे में चुर वो बेवफाई क्या जाने
ज़िन्दगी जीने वाले चैन और सुकून क्या जाने
जिनकी खुद खुदा से हो गुफ्तगू वो मेरी बात क्यूँ माने
जिनके दिल कि बात खुद खुदा जाने वो आरज़ू क्या जाने
जिन्हे मेरी खबर न हो वो मेरे दिल का राज़ क्या जाने "
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