आसार तो बन रहे थे अर्श में कुछ यूँ ही
अहकाम तो खुदा ने भी भेज दिए कुछ यूँ ही
अर्श भी कुछ हो रहे थे अफ़रोज़ कुछ यूँ ही
पहलु में आरहे बादल भी कुछ यूँ ही
बादलों ने हवावों से गुफ्तगू कर कुछ ली यूँ ही
अक्स भी मुझको लग रहे सितारे कुछ यूँ ही
आलम कुछ खुशनुमा बन रहा इस ओर कुछ यूँ ही।
अहकाम तो खुदा ने भी भेज दिए कुछ यूँ ही
अर्श भी कुछ हो रहे थे अफ़रोज़ कुछ यूँ ही
पहलु में आरहे बादल भी कुछ यूँ ही
बादलों ने हवावों से गुफ्तगू कर कुछ ली यूँ ही
अक्स भी मुझको लग रहे सितारे कुछ यूँ ही
आलम कुछ खुशनुमा बन रहा इस ओर कुछ यूँ ही।
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