क्रॉसिंग्स रिपब्लिक गाज़ियाबाद में लगभग २ घंटे संध्या फेरी हुई |
जिनमें प्रथम दो लाइन के नारे गूँजे | नारा था -
"देश के गद्दारों को
गोली मारो सालों को |"
किंतु नारों पर यदि ध्यान केंद्रित करें तो ना एगो गोली दिखी ना कोई दू नाली |
ज़ुबानी जंग में अब आम जनता भी सम्मिलित हो गयी है |
अरे ऐसे नारों और जुमलों से का होइगा | सब के सब प्रधानमंत्री थोड़े बन जाओगे |
इन दो लाईनों के साथ कुछ लाइन और जोड़ देते तो गद्दारों के ख़ात्मे के साथ साथ कुछ और भी मुनाफ़े हो जाते कि -
कहाँ रख दिए औज़ारों को
ज़रा तेल पीलावो उन भालों को |
सारे वादे अब जुमले हो गये
ज़रा स्विस से लाओ अब मालों को |
सरकार बना ली अफ़ज़ल के किरदारों संग
कश्मीर चलो अब साफ करो उन जालों को |
धैर्य धरो इंतज़ार करो तासीर है ऐसी मेरी इस मिट्टी की
वो दिन दूर न्हीं जब फोड़ देंगे हम सब मिलकर इन छालों को |
Courtesy : हसनैन
जिनमें प्रथम दो लाइन के नारे गूँजे | नारा था -
"देश के गद्दारों को
गोली मारो सालों को |"
किंतु नारों पर यदि ध्यान केंद्रित करें तो ना एगो गोली दिखी ना कोई दू नाली |
ज़ुबानी जंग में अब आम जनता भी सम्मिलित हो गयी है |
अरे ऐसे नारों और जुमलों से का होइगा | सब के सब प्रधानमंत्री थोड़े बन जाओगे |
इन दो लाईनों के साथ कुछ लाइन और जोड़ देते तो गद्दारों के ख़ात्मे के साथ साथ कुछ और भी मुनाफ़े हो जाते कि -
कहाँ रख दिए औज़ारों को
ज़रा तेल पीलावो उन भालों को |
सारे वादे अब जुमले हो गये
ज़रा स्विस से लाओ अब मालों को |
सरकार बना ली अफ़ज़ल के किरदारों संग
कश्मीर चलो अब साफ करो उन जालों को |
धैर्य धरो इंतज़ार करो तासीर है ऐसी मेरी इस मिट्टी की
वो दिन दूर न्हीं जब फोड़ देंगे हम सब मिलकर इन छालों को |
Courtesy : हसनैन
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