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मेरे मुल्क़ में तमाम लोग यह कहते हुए मिल जाएँगे कि हमारे देश मे असहिषुड्ता की कोई जगह नही |
किंतु ऐसा बिल्कुल नहीं है |
आज इसका जीता जागता नमूना इस खबर को देख कर मिल गया और ऐसा नहीं कि यह कोई नया मामला है ऐसे तमाम मामले घटे और भूतकाल में समा गये |
अभी तो यह कुछ भी नही यह तो बस शुरुआत है |
सच मे अच्छे दिन उन लोगों के आगये जो लोग आज तक हमारे इस मुल्क में बहुसंख्यक होते हुए भी अपने को सबसे दबे कुचले समझा करते थे |
मेरे जानने वाले एक लोग जो कभी अज़ान सुन कर निष्क्रिय रहते थे आज वह इसको फ़िज़ूल और हिंदुस्तान के पाकिस्तान बन जाने की बात गढ़ते हैं |
जिस प्रकार आए दिन एक भीड़ किसी मज़बूर और अल्पसंख्यक को बेरहमी से पीट पीट कर मार रही है और यह उनके शासनकाल मे जो सुशासन की गवाही दिया करते थे |
अभी मैं दावे के साथ कह रहा हूँ कि इस शासनकाल मे यह निंदनीय और शर्मनाक कहने वाले सत्ताधीश अगले सालों मे इसको सही सिद्ध करने की कवायद मे जुटे होंगें |
सौजन्य से : हसनैन
मेरे मुल्क़ में तमाम लोग यह कहते हुए मिल जाएँगे कि हमारे देश मे असहिषुड्ता की कोई जगह नही |
किंतु ऐसा बिल्कुल नहीं है |
आज इसका जीता जागता नमूना इस खबर को देख कर मिल गया और ऐसा नहीं कि यह कोई नया मामला है ऐसे तमाम मामले घटे और भूतकाल में समा गये |
अभी तो यह कुछ भी नही यह तो बस शुरुआत है |
सच मे अच्छे दिन उन लोगों के आगये जो लोग आज तक हमारे इस मुल्क में बहुसंख्यक होते हुए भी अपने को सबसे दबे कुचले समझा करते थे |
मेरे जानने वाले एक लोग जो कभी अज़ान सुन कर निष्क्रिय रहते थे आज वह इसको फ़िज़ूल और हिंदुस्तान के पाकिस्तान बन जाने की बात गढ़ते हैं |
जिस प्रकार आए दिन एक भीड़ किसी मज़बूर और अल्पसंख्यक को बेरहमी से पीट पीट कर मार रही है और यह उनके शासनकाल मे जो सुशासन की गवाही दिया करते थे |
अभी मैं दावे के साथ कह रहा हूँ कि इस शासनकाल मे यह निंदनीय और शर्मनाक कहने वाले सत्ताधीश अगले सालों मे इसको सही सिद्ध करने की कवायद मे जुटे होंगें |
सौजन्य से : हसनैन
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