देखते हैं तो कुछ कह भी दिया करें |
कभी कभी कही बातें सरकार तक ना पहुँचे लेकिन वह उपर वाला है ना, वह तो ज़रूर सुनता है क्यूंकी वह तो कण कण में है | हाँ ये ज़रूर है कि बहुत देर मे सुनता है | लेकिन जब सुनता है तो देखने वाले सिर्फ़ देखते ही रह जाते हैं |
इसलिए कहा कीजिए | नहीं कहेंगे तो शिकायत किससे करेंगे |
कल गुड़गाँव से लौटते वक़्त मेट्रो के धीमी रफ़्तार के कारण AIIMS के
ही मेट्रो स्टेशन पर उतर गया । सोचा अब cab से चलता हुँ यहाँ से ring road
पकड़ कर कुछ ही मिनट में DND होते हुए Crossings Republik पहुँच जाऊँगा ।
किंतु
बाहर निकलते ही वहाँ के दृश्य देख मैं दंग था । यह सोच रहा था कि एक
तस्वीर यह भी है मेरे देश की राजधानी की और मेरा दिल अन्दर से चीख़ रहा था
और इस बात की गवाही दे रहा था कि "अच्छे दिन अभी नहीं आए हैं " |
जहाँ
तमाम ख़र्च कर RCR या महज़ एक जगह के नाम बदलने पर कर दिए जाते हों क्या
इन बिमरियों से जूझ रहे उनके परिजनों के लिए एक ऐसा हाल नहीं बन सकता
जिसमें वह कम से कम एक रात गुज़ार सकें ।
या फिर यह भी सियासत एक
हिस्सा है यह दिखाने के लिए की समाज यह देख कर ख़ुद ही आत्मसात हो जाए कि
जनसंख्या इतनी है कि सब नामुमकिन है ।
हसनैन
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