मंगलवार, 18 जुलाई 2017

धक्का सहे ग़ाज़ी मियाँ मज़ा ले गये मुज़ावर |



पहले मंत्रालय से बहिष्कृति और फिर कयास यही लगाए जा रहे थे कि PM की गद्दी भले ही नहीं मिली किंतु संवैधानिक कुर्सी पर तो वह ही बैठेंगे |

मगर सारे कयास फेल हुए और राजनीतिक गलियारों मे ऐसा नाम उछाला कि कई राजनीतिक दलों के दाँतों तले उँगलिया दबाने के सिवा कुछ और ना था |
जैसे कुश्ती मे दाँव से खेल पर विजय हासिल की जाती है यही खेल राजनीति का भी है एक भी दाँव ग़लत पड़ा तो सीधे मुँह की खानी पड़ती है |
कुछ भी हो उन्होनें ने वीरता और सहनशीलता का परिचय दिया है । साथ ही मैं भाजपा की दूरदृष्टता की तारीफ़ करता हूँ । यह लोग लम्बी रेस के घोड़े हैं ।
अब भाजपा की राजनीतिक इतिहास का नया अध्याय शुरू हो चुका है । अभी कई अध्याय लिखे जाने बाकी हैं ।
जो लोग इनके पतन के सपने देखते हैं वह बहुत पिछड़ चुके हैं ।

हर दाँव हिंदुस्तान की सरजमीं पर मानिए अंगद के पाँव की आहट दिलाते हैं । जिसको हटाना, क्या हिला पाना किसी राजनीतिज्ञ के बस की बात नहीं ।

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