चुनावी मौसम में रंग बदलता फेसबुक, हर कोई मानो अपने दोस्तों की दोस्ती को भूल कर इन बहुरुपिया नेतावों के चंगुल में फँस गया हो, बस लोग बाग़ केवल चुनावी पेज़ शेयर, लाइक और कमेंट फूंकने में लगे हुए है, अब किसी को यारों की यारी सूझ नहीं पड़ती, अपनी फोटो सभी भूल बैठे हैं, हर कोई मोदी और केजरीवाल के रंग में रंगा नज़र आ रहा है मानो हर एक समर्थक को वोट बटोरने का ठेका दे दिया गया है कि जो जितना शेयर और लाइक करेगा मानो नेता जी के पक्ष में उतना ही वोट गिरेगा या ये कहें कि ये भी एक पैमाना जान पड़ता है कि इस बार किसकी सरकार बनने वाली है, अगर पूर्ण रूप से इसको ही पैमाना मान लिया जाये तो 'तीसरा मोर्चा' एक कोने में दुपका हुवा भी नज़र नहीं आता है।
अब बात करते हैं इन समर्थकों कि जो बहुत ही उत्साहित हैं आजकल, मैं तो इन समर्थकों को तीन भागों में बाँट कर देख रहा हूँ, जिसमे तीन तरह के समर्थक जान पड़ते हैं, एक तो वो बस किसी के शेयर में हामी वाली मुंडी हिला कर लाइक करके कट ले रहे हैं, वो अपनी अभिव्यक्ति किसी को प्रदर्शित नहीं करना चाह रहे हैं कि वो किस तरफ करवट लेंगे।
दूसरे प्रकार के समर्थक जो शेयर किये हुए तस्वीर की तारीफ़ में कुछ कुछ कमेंट देने से नहीं चूक रहे है मानो शेयर करने वाले की हौसला आफ़ज़ाई करने की पूरी ज़िम्मेदारी उन्होंने ही ले रखी है, और अपने साथी की इस कोशिश को बल देने में लगे हुए हैं । एक केजरीवाल की तारीफ में कुछ कमेंट लिख रहा है तो दूसरा उसका कटाक्ष और फिर पहले वाला अपनी बात की पुष्टि कर रहा है, और यदि इनमे से असमर्थ है तो उसी कमेंट को लाइक कर फिर सेकटने में देरी नहीं लगा रहा है, ये तो रहा कमेंट वाला समर्थक ।
और अब बारी आती है अंतिम प्रकार के समर्थक की जो उसको शेयर करने में चूक ही नहीं रहे हैं वो अपने आप को सबसे बड़े समर्थक के रूप में देख रहे हैं, उन्हें इस बात से कत्तई लेना देना नहीं कि शेयर की हुयी तस्वीर में कितनी सच्चाई है बस वो तो उसको आगे दूसरों के लिए परोस दे रहे हैं कि कितना ज्यादा ज्यादा लोगों तक पहुँच जाये उसके प्रभाव अथवा दुष्प्रभाव से उनका कोई वास्ता ही नहीं।
क्या आप सब लोगों को नहीं लगता कि ये सोशल नेटवर्किंग की मूलभूत परिभाषा को ही बदलने का काम कर रहा है, मेरा मत तो ये है की सोशल नेटवर्किंग का उद्देश्य है कि १ दूसरे का सहयोग, दोस्ती, प्रेम और १ दूसरे से जुड़े रहने कि प्रेरणा का सन्देश देना न कि द्वेष और दूरी को बढ़ाया जाना , किन्तु इस राजनीतिक माहौल ने तो यहाँ इस सोशल नेटवर्किंग के पटल को भी दूषित करने का जैसे जिम्मा ही ले लिया हो ।
किन्तु कोई चिंता की बात नहीं ये तो बस एक चुनावी बादल हैं जो ज्यादा दिन तक टिकने वाले नहीं है, अभी हमारे दिल-ओ-दिमाग पर छाए हुए हैं ये तो बस चुनाव मात्र तक ही सीमित हैं जल्द ही सारे बादल छँट जायेंगे और हम वापस फिर से उसी ज़िन्दगी की जद्दोजहद में अपने आपको समेट अपने रोज़मर्रा के काम पर लग जायेंगे, अभी भी लगे हुए हैं किन्तु दिमागी कसरत इस ओर हो रही है माहौल ही कुछ ऐसा है । ऐसा नहीं की नेता इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं कि ५ साल तो खूब मौज और मस्ती कर लिए हैं अब थोड़ा क़यूस्चन बैंक भी देख लो क्या पता कुछ इसी में से फस जाये बाकी इन्हे ये भी पता है की कापी जाँचने वाले को खुद ही कुछ नहीं आता तो हमको फेल कौन करेगा ।
कांपी जांचने वाला कोई नहीं बल्कि हम जनता ही हैं जो इन्हे पास और फेल करते हैं हम सब तो आशावादी हैं इसीलिए तो कभी अन्ना को गाँधी, केजरीवाल में शिव का रूप जो हर विष को पी लेगा और मोदी को मसीहा जो अपने आचार विचार से सब लोगों में जोश भर देगा और स्वावलम्बन परोस देगा, किन्तु हम सब को ये जान लेना चाहिए की इस मिलावटी ज़माने में इन सब लोगों से उम्मीद लगाना महज़ अपने आप को संतोष देने के बराबर है । यदि हम अपना उत्थान व विकास चाहते हैं तो वह हमारी स्वयं कि मेहनत और लगन से मिलने वाला है, इन लोगों के खोखले आश्वासन से तो बस इंतज़ार करते रहो अगर कुछ हो जाये तो बल्ले बल्ले नहीं तो थल्ले थल्ले तो हैं ही ।
अब बात करते हैं इन समर्थकों कि जो बहुत ही उत्साहित हैं आजकल, मैं तो इन समर्थकों को तीन भागों में बाँट कर देख रहा हूँ, जिसमे तीन तरह के समर्थक जान पड़ते हैं, एक तो वो बस किसी के शेयर में हामी वाली मुंडी हिला कर लाइक करके कट ले रहे हैं, वो अपनी अभिव्यक्ति किसी को प्रदर्शित नहीं करना चाह रहे हैं कि वो किस तरफ करवट लेंगे।
दूसरे प्रकार के समर्थक जो शेयर किये हुए तस्वीर की तारीफ़ में कुछ कुछ कमेंट देने से नहीं चूक रहे है मानो शेयर करने वाले की हौसला आफ़ज़ाई करने की पूरी ज़िम्मेदारी उन्होंने ही ले रखी है, और अपने साथी की इस कोशिश को बल देने में लगे हुए हैं । एक केजरीवाल की तारीफ में कुछ कमेंट लिख रहा है तो दूसरा उसका कटाक्ष और फिर पहले वाला अपनी बात की पुष्टि कर रहा है, और यदि इनमे से असमर्थ है तो उसी कमेंट को लाइक कर फिर सेकटने में देरी नहीं लगा रहा है, ये तो रहा कमेंट वाला समर्थक ।
और अब बारी आती है अंतिम प्रकार के समर्थक की जो उसको शेयर करने में चूक ही नहीं रहे हैं वो अपने आप को सबसे बड़े समर्थक के रूप में देख रहे हैं, उन्हें इस बात से कत्तई लेना देना नहीं कि शेयर की हुयी तस्वीर में कितनी सच्चाई है बस वो तो उसको आगे दूसरों के लिए परोस दे रहे हैं कि कितना ज्यादा ज्यादा लोगों तक पहुँच जाये उसके प्रभाव अथवा दुष्प्रभाव से उनका कोई वास्ता ही नहीं।
क्या आप सब लोगों को नहीं लगता कि ये सोशल नेटवर्किंग की मूलभूत परिभाषा को ही बदलने का काम कर रहा है, मेरा मत तो ये है की सोशल नेटवर्किंग का उद्देश्य है कि १ दूसरे का सहयोग, दोस्ती, प्रेम और १ दूसरे से जुड़े रहने कि प्रेरणा का सन्देश देना न कि द्वेष और दूरी को बढ़ाया जाना , किन्तु इस राजनीतिक माहौल ने तो यहाँ इस सोशल नेटवर्किंग के पटल को भी दूषित करने का जैसे जिम्मा ही ले लिया हो ।
किन्तु कोई चिंता की बात नहीं ये तो बस एक चुनावी बादल हैं जो ज्यादा दिन तक टिकने वाले नहीं है, अभी हमारे दिल-ओ-दिमाग पर छाए हुए हैं ये तो बस चुनाव मात्र तक ही सीमित हैं जल्द ही सारे बादल छँट जायेंगे और हम वापस फिर से उसी ज़िन्दगी की जद्दोजहद में अपने आपको समेट अपने रोज़मर्रा के काम पर लग जायेंगे, अभी भी लगे हुए हैं किन्तु दिमागी कसरत इस ओर हो रही है माहौल ही कुछ ऐसा है । ऐसा नहीं की नेता इस बात से इत्तेफ़ाक़ नहीं रखते हैं कि ५ साल तो खूब मौज और मस्ती कर लिए हैं अब थोड़ा क़यूस्चन बैंक भी देख लो क्या पता कुछ इसी में से फस जाये बाकी इन्हे ये भी पता है की कापी जाँचने वाले को खुद ही कुछ नहीं आता तो हमको फेल कौन करेगा ।
कांपी जांचने वाला कोई नहीं बल्कि हम जनता ही हैं जो इन्हे पास और फेल करते हैं हम सब तो आशावादी हैं इसीलिए तो कभी अन्ना को गाँधी, केजरीवाल में शिव का रूप जो हर विष को पी लेगा और मोदी को मसीहा जो अपने आचार विचार से सब लोगों में जोश भर देगा और स्वावलम्बन परोस देगा, किन्तु हम सब को ये जान लेना चाहिए की इस मिलावटी ज़माने में इन सब लोगों से उम्मीद लगाना महज़ अपने आप को संतोष देने के बराबर है । यदि हम अपना उत्थान व विकास चाहते हैं तो वह हमारी स्वयं कि मेहनत और लगन से मिलने वाला है, इन लोगों के खोखले आश्वासन से तो बस इंतज़ार करते रहो अगर कुछ हो जाये तो बल्ले बल्ले नहीं तो थल्ले थल्ले तो हैं ही ।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें