रविवार, 23 मार्च 2014

विरोधाभास-हर हर मोदी

कभी कभी अफ़सोस होता है तो लिखने बैठ जाता हूँ कि आज इस २१वीं सदी में प्रवेश किया हुवा भारत वर्ष का नागरिक उचित और अनुचित को भेद करने में असमर्थ हैं ।
हमें ये जानना अति आवश्यक है कि सत्य सदैव सत्य है और रहेगा, किन्तु असत्य कितनी ही कोशिश क्यूँ न करले वो सत्य नहीं हो सकता । सत्य की राह कभी कभी कठिन जरुर लगती है किन्तु उसका आनंद परमानन्द है, जो आनंद असत्य राह पर चलने वाला कभी नहीं चख सकता ।

अब आती है बात सत्य और असत्य में भेद करने की जो उससे भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, उसको अपने आचरण में उतारने की और उससे उपजे किसी भी सोच अथवा अभिव्यक्ति को व्यक्त करने की, इसमें भेद करते समय कई मानदंड हमारे उस विचार अथवा सोच में अहम् भूमिका का निर्वाहन करते हैं, अब हमें ये सोचना अति आवश्यक है कि हम इन नाना प्रकार के मानदंडों को किस प्रकार अपने दिल और दिमाग पर हावी होने देते हैं, मानदंड तो कई हैं किन्तु एक मानदंड पर ही मै सोचता हूँ जो हमारे ऊपर बड़ा आघात करता है, वो है कि हम किसी भी सत्यता अथवा असत्यता को न जानते हुए उसके बहाव में बह जाते हैं और नाना प्रकार की टिप्पणियाँ करने में लग जाते हैं ये वाकई में बहुत ही विचित्र है ।

इन्ही सब के बीच एक लोगों कि अभिव्यक्ति नारे के रूप में निकल कर आयी जो आज लोगों में खूब प्रचलित हो रहा है, जिस पर विवादों का ताण्डव धीरे धीरे मंडराना शुरू हो रहा है ।

जो नारा सुनने में आया है वह है 'हर हर मोदी, घर घर मोदी' जो अपने आप में ही पूरा का पूरा विरोधाभास है क्यूंकि उनकी स्वयं की पार्टी में कुछ लोग मोदी को स्वीकार करने में कोताही बरत रहे हैं और कुछ तो इस कारण इनसे अलग हो गए हैं, तो हम कैसे मान ले कि घर घर मोदी विराजमान हो गए हैं ।

किन्तु देश का कुछ एक तपका हर बात से बेखबर हो कर ऐसे नारे देने में लगा हुवा है जो सीधे सीधे अपने घरों से भगवान को ही विस्थापित कर रहा है, और महादेव की जगह मोदी विराजमान हो रहे हैं, क्या विडम्बना है हमारी। कुछ तो बुद्धि, विवेक का इस्तेमाल कर लो मित्रों ।

वो दिन अब दूर नही जब आने वाली पीढी 'हर हर महादेव' भूल 'हर हर मोदी' का जाप करेगा  ।

नारो का जोड तोड करिये किसी ने न ही रोका किन्तु कम से कम भगवान और इन्सान मे फ़र्क तो समझो लोगो, लहर के बहाव मे सम्भालो अपने आप को, कही ऐसा न हो ये सुनामी बन कर हमारे घरो को ही तबाह कर दे, अपनी स्वयं की शक्ति से बेखबर लोगों , अपनी शक्ति को पहचानो ।
एक बात हम सब को जान लेना चाहिए कि ये नेतागण तो एलेक्श्न मात्र तक है उस के बाद कोई झाँकने वाला नही, और दूसरी बात घरो मे सदैव महादेव ही रहने वाले है, ये तो बरसाती मेंढक मात्र है जो पाँच साल में एक बार इस चुनावी मौसम में टर्र टर्र करते हैं और उसके बाद क्या करते हैं हम सब से छुपा हुवा नहीं है । 

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