इक बात पर आगाह क्या कर दिया
अब बात बात पर हकलाते हैं ।
कभी कभी तो कतराते हैं । ।
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किसी के पास कुछ न होने का ग़म तो
किसी को उसे छुपाने का ग़म,
उफ़ गम ही गम इस जहाँ में ऐ मौला । ।
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मोहब्बत का हिस्सेदार और कौन है हमारे दरमियाँ
चलो इक बार आज इसका फैसला हो जाये ।
चलो इक बार फिर से उसके इस ज़ुर्रत की आज़माइश हो जाये ।
न तीर से न तलवार से, आज मोहब्बत की जंग हालात से हो जाये ।
चलो इक बार फिर से उसके मोहब्बत की जंग जज़्बात से हो जाये । ।
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नज़र को तालीम ऐसी दी है हमने ।
जिसको देखती है तारीफ बयान करती है । ।
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तौबा कर कर के गलती हर बार करते हैं ।
इंसानी फितरत है ये कि कारनामा हर बार करते है । ।
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ज़ात के इस खेल में लोग हो गए तार तार
और वो हैं के खुद को कहते है ज़ोरदार । ।
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आज इश्क़ की आज़माइश हो गयी
दिलों में क्या था उसकी नुमाइश हो गयी ॥
ज़िन्दगी एक और ग़म से आफ़ज़ाइश हो गयी
हमें तो बस दर्द-ए-दिल की ख्वाहिश हो गयी ॥
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हर चीज़ का वक़्त मुकर्रर है मेरे दोस्त
हाथ न मार पैरों को न चला । ।
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आफ़रीं आब-ए-रवां, जहाँ हो गया आइना
काबिल-ए-तारीफ इस जहाँ में, इक तू ही आइना-ए-साज़ । ।
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